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गुरुवार, 24 जुलाई 2014

INDIA GK TRICKS.....

भारत के प्रधान मंत्री



TRICK....      जवांगुल और लालगुलाब की तरह गांधी जी के चरणों में इंदिरा का जीव विश्वचन्द्र नरसिंह खम्ब की तरह अटल हो गया जो देव इंद्र से भी न टला.…… 


जवा- जवाहरलाल  नेहरू 
गुल- गुलजारी लाल नंदा 
लाल - लाल बहादुर शास्त्री 
गुलाब-गुलजारी लाल नंदा 
गांधी-इंदिरा गांधी 
जी -मोरार जी देसाई 
चरण- चौधरी चरण सिंह 
इंदिरा 
जीव-राजीव गांधी 
विश्व - विश्वनाथ प्रताप सिंह 
चन्द्र - चंद्रशेखर 
नर- नरसिम्हा राव 
अटल - अटल बिहारी वाजपेयी 
देव - H.D. देवगौड़ा 
इन्द्र-इंद्र कुमार गुजराल 
टला - अटल बिहारी वाजपेयी 


भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची

कुंजी:INC
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
JP
जनता पार्टी
JD
जनता दल
BJP
भारतीय जनता पार्टी
सं.नामकार्यकाल आरंभकार्यकाल समाप्तराजनैतिक दलजन्म स्थानशिक्षाचुनाव क्षेत्र
01जवाहरलाल नेहरू15 अगस्त, 194727 मई, 1964भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसइलाहाबाद, उत्तर प्रदेशहैरो स्कूल;
ट्रीनीटी कॉलेज, कैम्ब्रीज
इलाहाबाद,उत्तर प्रदेश;
फूलपूर (इलाहाबाद),उत्तर प्रदेश
02गुलजारीलाल नंदा*27 मई, 19649 जून, 1964भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेससियालकोट, पंजाबइलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबादमुंबई, महाराष्ट्र
03लालबहादुर शास्त्री9 जून, 196411 जनवरी, 1966भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसमुगलसराय, उत्तर प्रदेशकाशी विद्यापीठ, वाराणसीइलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
04गुलजारीलाल नंदा*11 जनवरी, 196624 जनवरी, 1966भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेससियालकोट, पंजाबइलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबादमुंबई, महाराष्ट्र
05इन्दिरा गान्धी24 जनवरी, 196624 मार्च, 1977भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसइलाहाबाद, उत्तर प्रदेशशांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड
रायबरेली, उत्तर प्रदेश;
मेडक, आंध्र प्रदेश
06मोरारजी देसाई24 मार्च, 197728 जुलाई, 1979जनता पार्टीभदेली, गुजरात(अज्ञात)सूरत, गुजरात
07चौधरी चरण सिंह28 जुलाई, 197914 जनवरी, 1980जनता पार्टीमेरठ, उत्तर प्रदेश(अज्ञात)बागपत, उत्तर प्रदेश
08इन्दिरा गान्धी14 जनवरी, 198031 अक्तूबर,1984भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसइलाहाबाद, उत्तर प्रदेशशांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड
रायबरेली, उत्तर प्रदेश;
मेडक, आंध्र प्रदेश
09राजीव गान्धी31 अक्तूबर,19842 दिसंबर, 1989कांग्रेस आई***मुंबई, महाराष्ट्रइलाहाबाद;
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड
अमेठी, उत्तर प्रदेश
10विश्वनाथ प्रताप सिंह2 दिसंबर, 198910 नवंबर, 1990जनता दलइलाहाबाद, उत्तर प्रदेशइलाहाबाद विश्वविद्यालय;
पुणे विश्वविद्यालय
फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
11चंद्रशेखर10 नवंबर, 199021 जून, 1991जनता दलइब्राहिमपट्टी, उत्तर प्रदेशइलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबादबलिया, उत्तर प्रदेश
12नरसिंह राव21 जून, 199116 मई, 1996भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसकरीमनगर, आंध्र प्रदेशओसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद;
मुंबई विश्वविद्यालय;
नागपुर विश्वविद्यालय
नंडयाल, आंध्र प्रदेश
13अटल बिहारी वाजपेयी16 मई, 19961 जून, 1996भारतीय जनता पार्टीग्वालियर, मध्य प्रदेशलक्ष्मीबाई कॉलेज, ग्वालियर;
डीएवी कॉलेज, कानपुर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
14एच डी देवगौड़ा1 जून, 199621 अप्रेल, 1997जनता दलहरदानाहल्ली, कर्नाटकहसन, कर्नाटककनकपुरा; हसन, कर्नाटक
15इंद्रकुमार गुज़राल21 अप्रेल, 199719 मार्च, 1998जनता दलझेलम (अब पाकिस्तान में)डीएवी कॉलेज, हैली कामर्स कॉलेज,लाहौरजलंधर, पंजाब
16अटल बिहारी वाजपेयी19 मार्च, 199822 मई, 2004भारतीय जनता पार्टीग्वालियर, मध्य प्रदेशलक्ष्मीबाई कॉलेज, ग्वालियर;
डीएवी कॉलेज, कानपुर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
17मनमोहन सिंह22 मई, 200422 मई, 2009भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसपंजाब प्रान्त के एक गाँव(अब पाकिस्तानमें)पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ;
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
असम राज्यसभा से
18मनमोहन सिंह22 मई, 200917 मई 2014भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसपजाब प्रान्त के एक गाँव (अब पाकिस्तानमें)पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़;
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
असम राज्यसभा से
19नरेन्द्र मोदी**26 मई, 2014अभी तकभारतीय जनता पार्टीवड़नगर, गुजरात, भारतगुजरात विश्वविद्यालय,
गुजरात
वाराणसी, उत्तर प्रदेश,
वडोदरा, गुजरात

गुरुवार, 10 जुलाई 2014

मध्य प्रदेश लोक नृत्य और लोक गीत

लोक नृत्य

भारत के किसी अन्य हिस्से की तरह मध्यप्रदेश भी देवी-देवताओं के समक्ष किए जानेवाले और विभिन्न अनुष्ठानों से संबंधित लोक नृत्यों द्वारा अपनी संस्कृती का एक परिपूर्ण दृश्य प्रदान करता है। लंबे समय से सभी पारंपरिक नृत्य, आस्था की एक पवित्र अभिव्यक्ति रहे है। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और मध्यप्रदेश की आदिवासी लोक कला अकादमी द्वारा खजुराहो में आयोजित ‘लोकरंजन ' - एक वार्षिक नृत्य महोत्सव है, जो मध्यप्रदेश और भारत के अन्य भागों के लोकप्रिय लोक नृत्य और आदिवासी नृत्यों को पेश करने के लिए एक बेहतरीन मंच है।

cultureculture

जब बुंदेलखंड क्षेत्र का प्राकृतिक और सहज नृत्य मंच पर आता है, तब पूरा माहौल लहरा जाता है और देखने वाले मध्यप्रदेश की लय में बहने लगते है। मृदंग वादक ढोलक पर थापों की गति बढाना शुरू करता है और नृत्य में भी गति आ जाती है। गद्य या काव्य संवादों से भरा यह नृत्य प्रदर्शन, ‘स्वांग' के नाम से मशहूर है। संगीत साधनों के साथ माधुर्य और संगीत से भरे नर्तक के सुंदर लोकनृत्य का यह अद्वितीय संकलन है। बढ़ती धड़कन के साथ गति बढ़ती जाती है और नर्तकों के लहराते शरीर, दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यह नृत्य विशेष रूप से किसी मौसम या अवसर के लिए नहीं है, लेकिन इसे आनंद और मनोरंजन की एक कला माना जाता है।

culture

बाघेलखंड का ‘रे' नृत्य, ढोलक और नगारे जैसे संगीत वाद्ययंत्र की संगत के साथ महिला के वेश में पुरूष पेश करते है। वैश्य समुदाय में, विशेष रूप से बच्चे के जन्म के अवसर पर, बाघेलखंड के अहीर समुदाय की महिलाएं यह नृत्य करती है। इस नृत्य में अपने पारंपरिक पोशाक और गहनों को पहने नर्तकियां शुभ अवसर की भावना व्यक्त करती है|

मटकी


‘मटकी' मालवा का एक समुदाय नृत्य है, जिसे महिलाएं विभिन्न अवसरों पर पेश करती है। इस नृत्य में नर्तकियां ढोल की ताल पर नृत्य करती है, इस ढोल को स्थानीय स्तर पर ‘मटकी' कहा जाता है। स्थानीय स्तर पर झेला कहलाने वाली अकेली महिला, इसे शुरू करती है, जिसमे अन्य नर्तकियां अपने पारंपरिक मालवी कपड़े पहने और चेहरे पर घूंघट ओढे शामिल हो जाती है। उनके हाथो के सुंदर आंदोलन और झुमते कदम, एक आश्चर्यजनक प्रभाव पैदा कर देते हैं।

गणगौर


culture
यह नृत्य मुख्य रूप से गणगौर त्योहार के नौ दिनों के दौरान किया जाता है। इस त्योहार के अनुष्ठानों के साथ कई नृत्य और गीत जुडे हुए है। यह नृत्य, निमाड़ क्षेत्र में गणगौर के अवसर पर उनके देवता राणुबाई और धनियार सूर्यदेव के सम्मान में की जानेवाली भक्ति का एक रूप है।

बधाईं


बुंदेलखंड क्षेत्र में जन्म, विवाह और त्योहारों के अवसरों पर ‘बधाईं' लोकप्रिय है। इसमें संगीत वाद्ययंत्र की धुनों पर पुरुष और महिलाएं सभी, ज़ोर-शोर से नृत्य करते हैं। नर्तकों की कोमल और कलाबाज़ हरकतें और उनके रंगीन पोशाक दर्शकों को चकित कर देते है।

बरेडी


दिवाली के त्योहार से पूर्णिमा के दिन तक की अवधि के दौरान बरेडी नृत्य किया जाता है। मध्यप्रदेश के इस सबसे आश्चर्यजनक नृत्य प्रदर्शन में, एक पुरुष कलाकार की प्रमुखता में, रंगीन कपड़े पहने 8-10 युवा पुरुषों का एक समूह नृत्य करता हैं। आमतौर पर, ‘दीवारी' नामक दो पंक्तियों की भक्ति कविता से इस नृत्य प्रदर्शन की शुरूवात होती है।

नौराता


मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में अविवाहित लड़कियों के लिए इस नृत्य का विशेष महत्त्व है। नौराता नृत्य के जरीये, बिनब्याही लडकियां एक अच्छा पति और वैवाहिक आनंद की मांग करते हुए भगवान का आह्वान करती है। नवरात्रि उत्सव के दौरान नौ दिन, घर के बाहर चूने और विभिन्न रंगों से नौराता की रंगोली बनाई जाती है।

अहिराई


culture
भरम, सेटम, सैला और अहिराई, मध्यप्रदेश की ‘भारीयां' जनजाति के प्रमुख पारंपरिक नृत्य हैं। भारीयां जनजाति का सबसे लोकप्रिय नृत्य, विवाह के अवसर पर किया जाता है। इस समूह नृत्य प्रदर्शन के लिए ढोल और टिमकी (पीतल धातु की थाली की एक जोड़ी) इन दो संगीत उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता हैं। ढोल और टिमकी बजाते हुए वादक गोलाकार में घुमते है, ढोल और टिमकी की बढती ध्वनी के साथ नर्तकों के हाथ और कदम भी तेजी से घुमते है और बढती-चढती धून के साथ यह समूह एक चरमोत्कर्ष तक पहुँचता है। संक्षिप्त विराम के बाद , कलाकार दुबारा मनोरंजन जारी रखते है और रात भर नृत्य चलता रहता है।

भगोरियां


विलक्षण लय वाले दशहरा और डांडरियां नृत्य के माध्यम से मध्यप्रदेश की बैगा आदिवासी जनजाति की सांस्कृतिक पहचान होती है। बैगा के पारंपरिक लोक गीतों और नृत्य के साथ दशहरा त्योहार की उल्लासभरी शुरुआत होती है। दशहरा त्योहार के अवसर पर बैगा समुदाय के विवाहयोग्य पुरुष एक गांव से दूसरे गांव जाते हैं, जहां दूसरे गांव की युवा लड़कियां अपने गायन और डांडरीयां नृत्य के साथ उनका परंपरागत तरीके से स्वागत करती है। यह एक दिलचस्प रिवाज है, जिससे बैगा लड़की अपनी पसंद के युवा पुरुष का चयन कर उससे शादी की अनुमति देती है। इसमें शामिल गीत और नृत्य, इस रिवाज द्वारा प्रेरित होते हैं। माहौल खिल उठता है और सारी परेशानियों से दूर, अपने ही ताल में बह जाता है।
परधौनी, बैगा समुदाय का एक और लोकप्रिय नृत्य है। यह नृत्य मुख्य रूप से दूल्हे की पार्टी का स्वागत और मनोरंजन करने के लिए करते हैं। इसके द्वारा खुशी और शुभ अवसर की भावना व्यक्त होती है। कर्मा और सैली (गोंड), भगोरियां (भिल), लेहंगी (सहारियां) और थाप्ती (कोरकू) यह कुछ अन्य जानेमाने आदिवासी नृत्य है।

लोक गीत


Folk SongsFolk SongsFolk Songs

किसी भी देश का इतिहास, वहां के लोकप्रिय गीतों के द्वारा बताया जाता है। पारंपरिक संगीत के चाहने वालों के लिए मध्यप्रदेश बेहतरीन दावते प्रदान करता है। यह लोक गीत, गायन की विशिष्ट शैली के द्वारा बलिदान, प्यार, कर्तव्य और वीरता की कहानियां सुनाते हैं। मूल रूप से राजस्थान के ‘ढोला मारू' लोकगीत, मालवा, निमाड़ और बुंदेलखंड क्षेत्र में लोकप्रिय है और इन क्षेत्रों के लोग अपनी विशिष्ट लोक शैली में प्यार, जुदाई और पुनर्मिलन के ढोला मारू गीत गाते है।

folk songs

मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में हर अवसर पर, यहां तक कि मौत पर भी महिलाओं को लोक गीत गाते देखना, कोई आशचर्य वाली बात नही है।

लोक गायन का एक रूप ‘कलगीतुर्रा', मंडला, मालवा, बुंदेलखंड और निमाड़ क्षेत्रों में लोकप्रिय है, जो चांग और डफ की धून के साथ प्रतियोगिता की भावना में जोश भरता है। इसमे महाभारत और पुराणों से लेकर वर्तमान मामलों पर आधारित गाने शामिल होते हैं और एक दूसरे को चतुराई से मात देने की कोशिशे रात भर चलती है। इस पारंपरिक गायकी का मूल, चंदेरी राजा शिशुपाल के शासनकाल मे पाया गया है। निमाड़ क्षेत्र में ‘निर्गुनी' शैली के नाम से लोकप्रिय इस गायकी में सिंगजी, कबीर, मीरा, दादू जैसे संतों द्वारा रचित गीत गाये जाते हैं। इस गायन में आम तौर पर इकतारा और खरताल (लकडी से जुडे छोटे धातु पटल वाला एक संगीत उपकरण) इन साजों का साथ होता है। निमाड़ में लोकगायन का एक अन्य बहुत लोकप्रिय रूप है ‘फाग', जो होली के त्योहार के दौरान डफ और चांग के साथ गाया जाता है। यह गीत प्रेमपूर्ण उत्साह से भरपूर होते है।

निमाड़ में नवरात्रि का त्योहार, लोकप्रिय लोक-नृत्य गरबा के साथ मनाया जाता है। गरबा गीत के साथ गरबा नृत्य, देवी शक्ति को समर्पित होता है। पारंपरिक रूप से गरबा पुरुषों द्वारा किया जाता है और यह निमाड़ी लोक-नृत्य और नाटक का एक अभिन्न हिस्सा है। गायन को मृदंग (ढोल एक रूप) का साथ होता है। रासलीला के दौरान यह गौलन गीत गाए जाते हैं। मालवा क्षेत्र के नाथ समुदाय के बीच भर्तृहरी लोक-कथा के प्रवचन सबसे लोकप्रिय गायन फार्म है। चिंकारा नामक (सारंगी का एक रूप, जो घोड़े के बाल से बने तारों वाला वाद्य होता है, मुख्य शरीर बांस से बना होता है और नारियल खोल से धनुष बनाया जाता हैं) स्थानीय साज के साथ महान राजा भर्तृहरी और कबीर, मीरा, गोरख और गोपीचंद जैसे संतों द्वारा रचित भजन गाए जाते है। इससे एक अद्वितीय ध्वनि निकलती है।

folk songs

मालवा क्षेत्र में युवा लड़कियों के समूह द्वारा गाये जाने वाले गीत, लोक संगीत का एक पारंपरिक मधुर और लुभावना फॉर्म है। समृद्धि और खुशी का आह्वान करने हेतु लड़कियां गाय के गोबर से संजा की मूरत बनाती है और उसे पत्ती और फूलों के साथ सजाती है तथा शाम के दौरान संजा की पूजा करती है। 18 दिन बाद, अपने साथी संजा को विदाई देते हुए यह उत्सव समाप्त होता है। मानसून की बारिश प्यासी पृथ्वी की प्यास बुझाती है, है, पेड़ो पर झुले सजते हैं और ऐसे में मालवा क्षेत्र के गीत सुनना मन को बेहद भाता है। हिड गायन में कलाकार पूर्ण गले की आवाज के साथ और शास्त्रीय शैली में आलाप लेकर गाते हैं। मालवा क्षेत्र में मानसून के मौसम के दौरान ‘बरसाती बरता' नामक गायन आमतौर पर होता है। बुंदेलखंड क्षेत्र योद्धाओं की भूमि है। अपने योद्धाओं को प्रेरित करने हेतु बुंदेलखंड के अलहैत समुदाय ने अल्लाह उदुल के वीर कर्मो से भरे गीतों की रचना की। 52 युद्ध लड़नेवाले अल्लाह उदुल की बहादुरी, सम्मान, वीरता और शौर्य के किस्से, इस क्षेत्र के लोग बरसात के मौसम के दौरान परंपरागत रूप से प्रदर्शित करते हैं। इसे ढोलक (छोटा ढोल, जिसे दोनो तरफ से हाथ के साथ बजाया जाता है) और नगारे (लोहा, तांबा जैसे धातु के दो ढोल, खोखले बर्तन के खुले चेहरे पर तानकर फैली भैंस की त्वचा जो पारंपरिक तरिके से लकड़िया से पीटा जाता है) के साथ गाया जाता है।

folk songs

होली, ठाकुर, इसुरी और राय फाग उत्सव से संबंधित गाने भी होते हैं। दिवाली के त्योहार के अवसर पर ढोलक, नगारा और बांसुरी की धुन के साथ देवरी गीत गाए जाते हैं। शिवरात्री, बसंत पंचमी और मकर संक्रांति के त्योहार के मौकों पर बुंबुलिया गीत गाए जाते हैं। बाघेलखंड क्षेत्र के लोक-गीतों की गायन शैली मध्यप्रदेश के अन्य क्षेत्रों से अलग है। इसमे पुरुष और महिला, दोनों की आवाज मजबूत और शक्तिशाली होती हैं। इन गानों में समृद्धि और विविधता होती है, जो इस क्षेत्र की संस्कृति और विरासत को दर्शाते है। गीतों के विषय में काफी विविधता होती है और उनमे विभिन्न विषय शामिल होते है।

बासदेव, बाघेलखंड क्षेत्र के गायकों का पारंपरिक समुदाय है, जो सारंगी और चुटकी पैंजन के साथ, पौराणिक बेटे श्रवण कुमार से जुडे गीत गाता है। पीले वस्त्र और सिर पर भगवान कृष्ण की मूर्ति से उनकी पहचान होती हैं। गायकों की जोड़ी यह गीत गाती है। रामायण तथा कर्ण, मोरध्वज, गोपचंद, भर्तृहरी, भोलेबाबा की कहानियां, बासदेव के गीतों के अन्य विषय है। गायकों की मनोवस्था दर्शाती, बिरहा और बिदेसीयां, बाघेलखंड की गायकी की दो अन्य महत्वपूर्ण शैलियां है। बिदेसीयां गीत प्यार, जुदाई और प्रेमी के साथ पुनर्मिलन के विषय से संबंधित होते है। बिदेसीयां गीत, प्यार करनेवाले से जल्दी लौटने की गुज़ारिश करता है। होली के त्योहार पर गाए जानेवाले ‘फाग' गीत, बसंत मौसम और व्यक्तिगत संबंधों की अभिव्यक्ति करते हैं। नगारा जोर-शोर से बजता है और गाने वाले उस धून पर सवार हो जाते हैं।

मध्यप्रदेश के प्रमुख मानचित्र

१.  राजनैतिक
 
२.- पर्यटन 

३ - भौगोलिक 
. 
.४ - खनिज पदार्थ 

५ - सड़कें 

६- निर्वाचन क्षेत्र 

. .

M.P. gk tricks.......

1.   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री -

ट्रिक- 
            रविमंडल, कैलाशमंडल  में द्वारिकानारायण राजा श्याम के प्रकाश में श्री श्याम के मित्र कैलाशवीर  सुंदरार्जुनमोती और श्यामसुन्दर की विजय हुई तथा उमा गौरी शिव का राज हुआ.। 

रवि-  श्री रविशंकर शुक्ल 
मंडल- श्री भगवंत राव मंडलोई 
कैलाश- श्री कैलाश नाथ काटजू 
द्वारिका - श्री  द्वारिका प्रसाद मिश्र  
नारायण - श्री गोविन्द नारायण सिंह 
राजा- राजा नरेशचंद्र सिंह 
श्याम- श्री श्यामाचरण शुक्ल 
प्रकाश- श्री प्रकाश चन्द्र सेठी 
वीर- श्री वीरेंद्र कुमार सखलेचा 
सुन्दर- श्री सुन्दरलाल पटवा 
अर्जुन- श्री अर्जुन सिंह 
मोती- श्री मोतीलाल वोरा 
विजय - श्री दिग्विजय सिंह
उमा- सुश्री उमा भारती 
गौरी- श्री बाबूलाल गौर 
शिव- श्री शिवराज सिंह 

 
क्रमांकनामअवधि
1श्री रविशंकर शुक्ल01.11.1956 to 31.12.1956
2श्री भगवन्त राव मण्डलोई01.01.1957 to 30.01.1957
3श्री कैलाश नाथ काटजु31.01.1957 to 14.04.1957
4श्री कैलाश नाथ काटजु15.04.1957 to 11.03.1962
5श्री भगवन्त राव मण्डलोई12.03.1962 to 29.09.1963
6श्री द्वारका प्रसाद मिश्रा30.09.1963 to 08.03.1967
7श्री द्वारका प्रसाद मिश्रा09.03.1967 to 29.07.1967
8श्री गोविन्द नारायण सिंह30.07.1967 to 12.03.1969
9श्री राजा नरेशचन्द्र सिंह13.03.1969 to 25.03.1969
10श्री श्यामाचरण शुक्ल26.03.1969 to 28.01.1972
11श्री प्रकाश चन्द्र सेठी29.01.1972 to 22.03.1972
12श्री प्रकाश चन्द्र सेठी23.03.1972 to 22.12.1975
13श्री श्यामाचरण शुक्ल23.12.1975 to 29.04.1977
राष्ट्रपति शासन30.04.1977 to 25.06.1977
14श्री कैलाश चन्द्र जोशी26.06.1977 to 17.01.1978
15श्री विरेन्द्र कुमार सखलेचा18.01.1978 to 19.01.1980
16श्री सुन्दरलाल पटवा20.01.1980 to 17.02.1980
राष्ट्रपति शासन18.02.1980 to 08.06.1980
17श्री अर्जुन सिंह09.06.1980 to 10.03.1985
18श्री अर्जुन सिंह11.03.1985 to 12.03.1985
19श्री मोती लाल वोरा13.03.1985 to 13.02.1988
20श्री अर्जुन सिंह14.02.1988 to 24.01.1989
21श्री मोती लाल वोरा25.01.1989 to 08.12.1989
22श्री श्यामाचरण शुक्ल09.12.1989 to 04.03.1990
23श्री सुन्दरलाल पटवा05.03.1990 to 15.12.1992
राष्ट्रपति शासन16.12.1992 to 06.12.1993
24श्री दिग्विजय सिंह07.12.1993 to 01.12.1998
25श्री दिग्विजय सिंह01.12.1998 to 08.12.2003
26सुश्री उमा भारती08.12.2003 to 23.08.2004
27श्री बाबूलाल गौर23.08.2004 to 29.11.2005
28श्री शिवराज सिंह चौहान29.11.2005 to 12.12.2008
29श्री शिवराज सिंह चौहान12.12.2008 to 13.12.2013
30श्री शिवराज सिंह चौहान14.12.2013 to निरंतर